चाचोंद। ग्राम चाचोंद में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा स्थल पर सुबह से ही भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया और पूरा वातावरण भक्ति रस में डूबा नजर आया। कथा के दौरान आचार्य बृजमोहन महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की महाभारत युद्ध के बाद की लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया।
आचार्य जी ने बताया कि महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण द्वारका लौटे, लेकिन समय और श्राप के प्रभाव से यदुवंश का विनाश हो गया। आपसी संघर्ष के कारण पूरा कुल समाप्त हो गया और अंततः भगवान श्रीकृष्ण की पावन नगरी द्वारका समुद्र में समा गई। इस मार्मिक प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे।
कथा में परीक्षित महाराज को मिले श्राप का प्रसंग भी सुनाया गया। आचार्य जी ने बताया कि क्रोध और अहंकार मनुष्य को विनाश की ओर ले जाते हैं, जबकि धर्म और संयम जीवन को सही दिशा देते हैं।
भक्तों को सत्य के मार्ग पर चलने की सीख देते हुए आचार्य बृजमोहन महाराज ने धर्मराज युधिष्ठिर और गुरु द्रोणाचार्य का प्रसिद्ध प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि महाभारत युद्ध के दौरान गुरु द्रोणाचार्य को भ्रमित करने के लिए युधिष्ठिर ने “अश्वत्थामा मारा गया, नर या कुंजर” कहा था। धर्मराज के इस छोटे से असत्य का भी उन्हें परिणाम भुगतना पड़ा। आचार्य जी ने कहा कि सत्य मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है और झूठ कभी भी कल्याणकारी नहीं होता।
कथा आयोजन में परीक्षित के रूप में लक्ष्मण शर्मा एवं सरोज देवी ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर कथा का श्रवण किया। कथा स्थल पर भजन-कीर्तन और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
आचार्य जी ने बताया कि अगले दिन भगवान नरसिंह अवतार की कथा सुनाई जाएगी, जिसमें भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु के प्रकट होने की दिव्य लीला का वर्णन किया जाएगा।
