CMO डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि —
1 से 5 वर्ष तक के बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से दवा दी जा रही है
6 से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों को स्कूलों में स्वास्थ्य विभाग की टीम शिक्षकों की सहायता से दवा खिला रही है
दवा चबाकर खानी अनिवार्य है
किसी भी बच्चे को दवा घर ले जाने के लिए नहीं दी जाएगी, टीम की निगरानी में ही सेवन कराया जा रहा है
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि जो बच्चे अभियान दिवस पर दवा नहीं ले पाएंगे, उन्हें 13 फरवरी को मॉप-अप राउंड के दौरान दवा खिलाई जाएगी।
1 से 2 साल के बच्चों को आधी गोली
2 से 19 साल तक के बच्चों व किशोरों को पूरी गोली दी जाएगी
छोटे बच्चों को गोली पीसकर, जबकि बड़े बच्चों को चबाकर खिलाई जा रही है
अभियान को सफल बनाने में एविडेंस एक्शन इंडिया संस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यूनिसेफ के प्रतिनिधि भी अभियान के दौरान मौजूद रहे।
कक्षा 8 की छात्रा प्राची ने बताया कि उसने और उसकी सहपाठियों ने दवा खा ली है और किसी को कोई परेशानी नहीं हुई।
कार्यक्रम के दौरान एविडेंस एक्शन इंडिया के शाहिद, यूनिसेफ प्रतिनिधि राहुल कुलश्रेष्ठ, प्रधानाचार्य श्याम किशोर, रितु अग्रवाल, एमओआईसी ताजगंज डॉ. अर्चना लकड़ा, स्वास्थ्य निरीक्षिका निर्मला परिहार, एएनएम आसिया, वार्ड सदस्य सुधीर राठौर, आशा कार्यकर्ता मंजू, आशारानी, प्रीती, पूजा और प्रशांत सहित कई स्वास्थ्य कर्मी मौजूद रहे।