मौत के मुंह से वापस लौटा मरीज
आगरा के बोदला निवासी 66 वर्षीय रतन लाल शर्मा पिछले कई महीनों से गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे थे। उनकी दो मुख्य धमनियां पूरी तरह ब्लॉक थीं और दिल की कार्यक्षमता बेहद कम हो चुकी थी। हालत बेहद नाजुक होने के बावजूद डॉक्टरों ने चुनौती स्वीकार की और सर्जरी का फैसला लिया।
बिना दिल रोके हुई सर्जरी
13 अप्रैल 2026 को करीब 3 घंटे चले ऑपरेशन में ‘बीटिंग हार्ट’ तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसमें दिल को रोके बिना ही बायपास सर्जरी की जाती है। यह तकनीक बेहद जटिल मानी जाती है और एसएन मेडिकल कॉलेज के इतिहास में पहली बार सफल हुई है।
रिकॉर्ड रिकवरी: दूसरे ही दिन छुट्टी
इस सर्जरी की सबसे खास बात मरीज की तेजी से रिकवरी रही। जहां आमतौर पर ऐसे मरीजों को 5 से 7 दिन अस्पताल में रखा जाता है, वहीं यहां मरीज को सिर्फ 72 घंटे के भीतर डिस्चार्ज कर दिया गया। इसे देश के स्तर पर भी एक दुर्लभ उपलब्धि माना जा रहा है।
गरीब मरीज को मुफ्त मिला जीवनदान
रतन लाल के पास न तो आयुष्मान कार्ड था और न ही इलाज के पैसे। इसके बावजूद “असाध्य रोग योजना” के तहत उनका पूरा इलाज मुफ्त किया गया। जिस सर्जरी के लिए निजी अस्पतालों में 3 से 4 लाख रुपये तक वसूले जाते हैं, वही इलाज सरकारी अस्पताल में बिना किसी शुल्क के किया गया।
निजी अस्पतालों पर उठते सवाल
यह सफलता एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर आम लोगों से भारी-भरकम रकम वसूली जाती है। कई बार मरीजों को डर और मजबूरी का फायदा उठाकर अनावश्यक खर्चों में फंसा दिया जाता है।
इसके विपरीत, सरकारी अस्पताल अब न सिर्फ सस्ते बल्कि उच्च स्तर के इलाज का भी केंद्र बनते जा रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सही संसाधन और समर्पण के साथ सरकारी संस्थान भी बड़े-बड़े मेडिकल रिकॉर्ड बना सकते हैं।
प्राचार्य का बयान
कॉलेज के प्राचार्य Dr. Prashant Gupta ने इस उपलब्धि को पूरे संस्थान की टीमवर्क का नतीजा बताते हुए कहा कि अब आगरा के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर भागने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एस.एन. मेडिकल कॉलेज में हृदय की पहली बीटिंग हार्ट सर्जरी सफलतापूर्वक हुई है। यह पूरे संस्थान की सामूहिक मेहनत है। हमारा लक्ष्य है कि अब आगरा के मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता न पड़े।"
समर्पित टीम का योगदान
इस सर्जरी में सर्जन, एनेस्थीसिया और नर्सिंग स्टाफ की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनकी मेहनत और समर्पण से यह असंभव कार्य संभव हो पाया।
एसएन मेडिकल कॉलेज की यह सफलता न सिर्फ चिकित्सा क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ती है, बल्कि आम जनता के लिए यह भरोसा भी मजबूत करती है कि सरकारी अस्पतालों में भी अब विश्वस्तरीय इलाज संभव है—वो भी बिना आर्थिक बोझ के।
